हमारे बोर्ड सलाहकार


किशोरी जे. उदेशी

श्रीमती किशोरी जे. उदेशी ने बॉम्बे विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में एम.ए. किया है। वे पेशेवर करियर चुनकर केंद्रीय बैंकिंग में गईं और भारतीय रिजर्व बैंक के डिप्टी-गवर्नर के रूप में नियुक्त होने वाली पहली महिला बनीं। वह भारतीय स्टेट बैंक के बोर्ड में मनोनीत होने वाले आरबीआई के पहले कार्यकारी निदेशक का गौरव भी रखती हैं। डिप्टी-गवर्नर के रूप में उनके पोर्टफोलियो में से एक बैंकिंग और गैर-बैंकिंग क्षेत्र के विनियमन और पर्यवेक्षण में होना शामिल था। उन्होंने लिआइसन ग्रुप के कोर प्रिंसिपल और बैंकिंग पर्यवेक्षण पर बेसल कमेटी के कोर प्रिंसिपल वर्किंग ग्रुप पर आरबीआई का प्रतिनिधित्व किया, जो कि अंतर्राष्ट्रीय निपटान, स्विट्जरलैंड के लिए बैंक द्वारा स्थापित किया गया था। डिप्टी-गवर्नर के रूप में वे सेबी, नाबार्ड और एक्जिम बैंक के बोर्ड में थीं और भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रा (प्राइवेट) लिमिटेड, बैंगलोर के अध्यक्ष के रूप में भी कार्यरत थीं। उन्होंने डिपोजिट बीमा और क्रेडिट गारंटी निगम के अध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया। 2006 में इन्हे आरबीआई द्वारा बैंकिंग कोड्स और स्टैंडर्ड बोर्ड ऑफ इंडिया के अध्यक्ष पद पर नियुक्त किया गया। 2011 में उन्होंने इस ऑफिस से त्यागपत्र दे दिया| भारत सरकार (जीओआई) ने उन्हें न्यायमूर्ति श्रीकृष्ण की अध्यक्षता में वित्तीय क्षेत्र विधान सुधार आयोग का सदस्य नियुक्त किया। महाराष्ट्र सरकार ने इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी, मुंबई के बोर्ड में नामित किया। वे कुछ कंपनियों के बोर्डों पर एक स्वतंत्र गैर-कार्यकारी निदेशक हैं।

जे सागर एसोसिएट्स के पूर्व वरिष्ठ साथी अब एक निजी वकील हैं। वे कॉर्पोरेट और व्यापारिक कानूनों के विशेषज्ञ हैं और 1980 से काम कर रहे हैं। वे 1997 से 2003 तक उडवाडिया, उदेशी और बर्जिस के प्रबंध भागीदार थे। वे भारतीय मध्यस्थता परिषद और अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थता के लंदन कोर्ट के मध्यस्थों के पैनल में हैं। उन्होंने एक अग्रणी अखबार के साथ पत्रकार के तौर पर भी काम किया। वे अमेरिकी एरबिरेशन एसोसिएशन के सहयोगी सदस्य, आईसीसी-भारत के और द बॉम्बे लॉ सोसायटी के सदस्य है। वे वर्तमान में कई निगमों में गैर कार्यकारी स्वतंत्र बोर्ड सदस्य के रूप में हैं।


बर्जिस देसाई


संजय कुमार भट्टाचार्य

वे स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के पूर्व प्रबंध निदेशक और मुख्य क्रेडिट और जोखिम अधिकारी रहे हैं। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफेंस कॉलेज से अर्थशास्त्र ऑनर्स में स्नातक किया है और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकर्स (सीएआईआईबी) के प्रमाणित सहयोगी है। बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र में उन्हें चार दशक का अनुभव है। वरिष्ठ स्तर के बैंकर के रूप में, उनकी विशेषज्ञता भौगोलिक क्षेत्रों, खुदरा बैंकिंग, क्रेडिट और जोखिम प्रबंधन, देयता प्रबंधन और मानव संसाधन प्रबंधन में अंतर्राष्ट्रीय और कॉर्पोरेट बैंकिंग जैसे विभिन्न क्षेत्रों में फैली हुई है। उन्होंने कई कॉर्पोरेट हाउसेस के बोर्ड में स्वतंत्र निदेशक के रूप में कार्य किया है।

वित्तीय सेवा क्षेत्र में चार दशकों के अनुभव के साथ एक वाणिज्यिक बैंकर, वास्तु हाउसिंग फाइनेंस में गैर-कार्यकारी निदेशक है। वे उस कोर टीम का हिस्सा थे, जिसने शुरुआत से आईसीआईसीआई बैंक लिमिटेड की स्थापना की| वे नेशनल कमोडिटीज एंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज लिमिटेड के संस्थापक, प्रबंध निदेशक और सीईओ भी थे। उन्होंने और उनकी टीम ने संकल्पना और विनिमय की स्थापना की। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकर्स और चार्टर्ड इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकर्स लंदन के एक सहयोगी के रूप में पेशेवर योग्यता के साथ वाणिज्य स्नातक के साथ वे सिक्योरिटीज इंवेस्टमेंट्स इंस्टीट्यूट, लंदन के फैलो भी हैं।


पी एच रविकुमार


बॉबी पारीख

बॉबी पारीख मुंबई विश्वविद्यालय से वाणिज्य स्नातक और योग्य चार्टर्ड एकाउंटेंट है। बॉबी रणनीतिक कर और नियामक सलाहकार सेवाएं दे रहे बुटीक फर्म ‘बॉबी पारीख एसोसिएट्स’ के संस्थापक हैं।
उनका फोकस प्राथमिक रूप से वे लेनदेन और व्यापार पुनर्गठन, चाहे इनबाउंड, आउटबाउंड या पूरी तरह घरेलू हो, के संबंध में कर और नियामक सलाह प्रदान करना है। बॉबी निजी इक्विटी फंड, अन्य संस्थागत निवेशकों और मालिकों और व्यवसायों के प्रबंधकों के साथ बड़े पैमाने पर काम करते हैं। वह नियामकों और नीति सूत्रों, नए नियमों और नीतियों के निर्माण में सहायता के लिए इनपुट प्रदान करने और इनके प्रभाव और प्रभावकारिता का आकलन करने और कार्रवाई के लिए प्रतिक्रिया प्रदान करने में भी जुड़े हुए है। बॉबी बीएमआर सलाहकारों के सह-संस्थापक थे, जो एक्सेस कर और लेनदेन का प्रतिष्ठित फर्म थी, जिसे उन्होंने स्थापित करने और 12 वर्षों से अधिक चलाने में मदद की। पूर्व में, भारत में अर्न्स्ट एंड यंग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और आर्थर एंडर्सन के देश के प्रबंध भागीदार, बॉबी कई व्यापार और व्यापार संघों के सदस्य के साथ-साथ गैर-सरकारी के सलाहकार और कार्यकारी बोर्ड के सदस्य भी रहे हैं। साथ ही लाभकारी संगठनों और निजी सूचीबद्ध भारतीय कंपनियों के लिए लिए भी सेवाएं दी हैं।

ओल्ड ब्रिज कैपिटल मैनेजमेंट के संस्थापक निदेशक और मुख्य निवेश अधिकारी, केनेथ पोर्टफोलियो प्रबंधन और निवेश अनुसंधान में भारतीय पूंजी बाजारों में 26 साल से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। इससे पहले वे आईडीएफसी एसेट मैनेजमेंट में मुख्य निवेश अधिकारी थे। उन्होंने 9 बिलियन अमरीकी डॉलर के एक कॉर्पस को संभाला था। अपने सक्षम नेतृत्व के तहत इन्हें आईडीएफसी एमएफ को भारत में सबसे तेजी से बढ़ रहे म्यूचुअल फंड के रूप में स्थान दिलवाया। आईडीएफसी से पहले, वे कोटक महिंद्रा एसेट मैनेजमेंट में पोर्टफोलियो मैनेजर थे। वे आईडीएफसी और कोटक महिंद्रा दोनों के लिए एसेट मैनेजमेंट बिजनेस बढ़ाने वाले प्रमुख थे। वे एन एम कॉलेज ऑफ कॉमर्स एंड इकोनॉमिक्स, मुंबई विश्वविद्यालय से वाणिज्य स्नातक हैं।


केनेथ एंड्रैड

हमारे गुरु

तमल बंदोपाध्याय

तमल, ‘मिंट’ में प्रकाशित अपने साप्ताहिक स्तम्भ ‘बैंकिंग एंड फायनेंस बैंकर्स ट्रस्ट’ के लिए व्यापार पत्रकार के तौर पर जाने जाते हैं। एच.टी. मीडिया ने जब एक दशक पहले मिंट की शुरूआत की थी तब वह इसकी मुख्य टीम के सदस्य थे और वर्तमान में ‘बिजनेस स्टैंडर्ड’ के साथ विशेषज्ञ स्तंभकार है। वह बंधन बैंक लिमिटेड के सलाहकार है और उन्होंने वित्त पर कुछ अत्यधिक लोकप्रिय किताबें लिखी हैं जिनमें ‘ए बैंक फॉर द बक’, ‘सहाराः द अनटोल्ड स्टोरी’ और बंधनः द मेकिंग ऑफ अ बैंक’ शामिल हैं।

राधाकृष्ण नायर

आई.आर.ई.डी.ए., सेबी और आई.सी.आई.सी.आई. समूह की विभिन्न कंपनियों में बोर्ड स्तर के पदों पर काम करने के साथ ही उनके पास बैंकिंग, प्रतिभूतियों और बीमा क्षेत्र में चार दशक से भी ज्यादा अनुभव है। वह बीमा और प्रतिभूति क्षेत्र में नवाचार की प्रमुख पहल करने के लिए जाने जाते हैं।

अशोक बराट

इन्होंने बहुराष्ट्रीय कंपनियों (भारत और विदेश) जैसे युनिलिवर, पेप्सी, टेल्स्ट्रा और हेंज के लिए काम किया है और भारत के चार्टर्ड अकाउंटेंट्स और कंपनी सचिव के साथी सदस्य है। वह फोब्र्स कंपनी के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में सेवानिवृत्त हुए थे। वह बॉम्बे चैम्बर ऑफ़ कॉमर्स और इंडस्ट्री के भूतपूर्व अध्यक्ष, एसोसियेटेड चैम्बर ऑफ़ कॉमर्स और इंडस्ट्री के एम.सी. सदस्य और आई.आई.एम. (लखनऊ) के भूतपूर्व अतिथि प्राध्यापक है।

हमारी टीम

रजत
संस्थापक और आरंभकर्ता

रजत ‘इनहेरिटेंस नीड्स सर्विसेज प्रा. लि. (आई.एन.एस.पी.एल.) के संस्थापक निदेशक है और उनकी पत्नी देवयानी सह-संस्थापक है।

रजत विधि-स्नातक है और इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड एकाउंटेंट्स और कंपनी सेक्रेटरी ऑफ इंडिया के सदस्य है।

उन्होंने अपना कैरियर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के साथ आरंभ किया था। उनके पास कपड़ा, औषधीय, क्रेडिट रेटिंग, शिपिंग, लॉजिस्टिक, हाइड्रोकार्बन और निवेश बैंकिंग जैसे विभिन्न क्षेत्रों के कॉर्पोरेट्स में वित्त, साचिविक और कानूनी कार्यों को संभालने का तीन दशक से ज्यादा का अनुभव है। रजत के कॉर्पोरेट अनुभव में उन कंपनियों के रणनीतिक निवेशकों, निजी इक्विटी निवेशकों और सार्वजनिक बाजार निवेशकों (खुदरा और संस्थागत) के साथ व्यवहार करना शामिल है जिनकी पी.आई.पी.ई., आई.पी.ओ., अधिकार और अधिमानी आवंटन के माध्यम से इक्विटी जारी की गई थी। रेटिंग अभ्यास के दौरान क्रिसिल के साथ रजत के अनुभव ने उनकी विभिन्न पूंजी साधनों और ढांचों से पहचान कराई। वह टोरेंट समूह की पहली कंपनी की मुख्य टीम के सदस्य थे, जो आई.पी.ओ. बाजार में पहुंची और साथ ही क्रिसिल को बाजार तक पहुंचाने का सौभाग्य भी उन्हें प्राप्त हुआ। अपनी शैक्षणिक योग्यता के वजह से हस्तांतरण और उत्तराधिकार के मामलों की अलग-अलग परिस्थितियों रूबरू होने के साथ ही डीमर्जर प्रक्रिया का व्यावहारिक अनुभव। रजत को पेशेवर रूप से प्रबंधित, संस्थागत स्वामितव वाले व्यवसाय के साथ ही परिवार द्वारा संचालित व्यवसाय में काम करने का अनुभव है।

रजत ने अतीत में पूंजी निर्गम व्यवस्था के नियंत्रक से लेकर भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड द्वारा संचालित बाजारों के स्वतंत्र मूल्य निर्धारण तक, विभिन्न वैधानिक व्यवस्थाओं के अधीन अपना सफर तय किया है। वह संबद्ध व्यावहारिक जटिलताओं को समझते हैं। प्रारंभिक सार्वजनिक आॅफरिंग, अधिकार जारी करने और डीमर्जर प्रक्रिया में उनके व्यावहारिक अनुभव ने सैद्धांतिक ज्ञान के आधार को सहारा देने के लिए पर्याप्त अनुभवात्मक अंतर्दृष्टि प्रदान की है।

आई.एन.एस.पी.एल. की मौजूदा सेवाओं में विभिन्न प्रतिपक्षों के साथ व्यवहार शामिल है जिसमें हितधारकों के लगातार संपर्क और संकल्पना की स्पष्टता आवश्यक है जो प्रतिनिधिक संवाद का आधार बनाता है और सही प्रतिनिधित्व करने में सक्षम बनाता है।

उनकी टीम में बैंकिंग, व्त्ति, सचिवीय और कानूनी, निवेशक संबंधों और शेयर पंजीकरण के क्षेत्र में कॉर्पोरेट अनुभव और गहरा ज्ञान रखने वाले स्व-प्रेरित पेशेवर शामिल हैं।

विजय मार्केटिंग के क्षेत्र से हैं, और अच्छे व्यावसायिक रिश्ते बनाकर रखने में विश्वास रखते हैं| उन्हें एनबीएफसी एवं वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में लगभग दो दशकों का अनुभव है| अपने आखिरी प्रायोजन में वे फिनेंशियल इन्क्लूज़न एवं डिजिटल पेमेंट स्पेस में कार्यरत थे|

अपने करियर की शुरुआत उन्होंने अर्धशहरी रीटेल मार्केटिंग क्षेत्र से की| शार्प एवं वैंकी (Venky’s)ग्रुप के साथ काम करते हुए उनकी विशुद्ध भारतीय परिवारों  के प्रति सोच परिपक्व हुई, जिससे उन्हें बाज़ार की ओर रुख करने की रणनीति विकसित करने में काफी मदद मिली| यह बात तब और महत्वपूर्ण हो जाती है
जब एक कंपनी का कामकाज  विरासत जैसे संवेदनशील विषय पर केंद्रित है|

क्रिसिल एवं आर.आर.डोंनली में उनका कार्यक्षेत्र परिचालन रहा, जिससे वे वैश्विक निवेश बैंकर्स एवं वैश्विक वित्तों के शोध प्रमुखों को अपनी सेवाएं देने की काबिलियत विकसित कर पाए| फिनो में अपने कार्यकाल के दौरान वे पश्चिमी ज़ोन के प्रमुख रहे, एवं इस दौरान वित्तीय समावेश की परियोजनाओं पर उन्होंने बैंकिंग एवं वित्तीय संस्थाओं तथा सरकारी संस्थाओं के साथ काफी समन्वय स्थापित किया|

विजय एसबीआईएम (SIBM) से  डीएमएम एवं आईएमई से मैनेजमेंट स्नातक हैं|

विजय कनकनवाड़ी
Market Access Officer

संदीप वडनेरे

वह एक उत्पाद रणनीतिकार है जिनके पास इंजीनियरिंग, सेवा प्रबंधन और विपणन क्षेत्रों में 14 वर्षों से अधिक का अनुभव है।

वह हेड हॉन्कोस की मुख्य टीम का हिस्सा थे और उन्होंने इंजीनियरिंग और उत्पाद टीमों की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की थी, इसके साथ ही संकल्पना से लेकर उस विचार को टिकाऊ और सफल व्यापार में बदलने में पूरी तरह से शामिल थे। संदीप ने उत्पाद दिशानिर्देश और प्रौद्योगिकी परिदृश्य को परिभाषित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

हेड हॉन्कोस आरंभ करने के पहले संदीप गुड़गांव में स्थित बुटिक परामर्श फर्म ‘केस्पर कंसल्टिंग’ की संस्थापक टीम के सदस्यों में से एक थे।

उन्होंने दिल्ली में ‘लीप ऑफ फेथ’ (कंबल वितरण) भी शुरू किया था।

इंफोसिस टेक्नोलोजिस लि. के भूतपूर्व छात्र संदीप वी.ई.एस.आई.टी., मुंबई से कंप्यूटर विज्ञान में इंजीनियरिंग स्नातक है और एक्स.एल.आर.आई स्कूल ऑफ बिजनेस एंड ह्यूमन रिर्सोसेज, जमशेदपुर से पी.जी.डी.एम. किया है।